




6.गला बैठनाः 2 चम्मच ताजे घी में पिसी कालीमिर्च डालकर गर्म करें और ठंडा होने पर भोजन के बाद लें। इसके बाद पानी न लें पहले ही पानी पी लें। 7.सोते समय लेने से सुबह गला खुल जायेगा। आधाशीशी सिरदर्दः गाय का घी सबेरे-शाम नाक में डालें इससे 7 दिन में आधाशीशी रोग बिल्कुल दूर होता है। 8.मुच्र्छा आना या सुन्न होनाः किसी व्यक्ति को मूच्र्छा आने, चेतनशून्य होने तथा शरीर के किसी भाग के सुन्न पड़ जाने पर गाय के घी की मालिश करने से तुरन्त चेतना आ जाती है। 9.नकसीर (नाक से रक्तस्राव)ः नकसीर फूटने पर नाक में दोनों तरफ घी की बूँदें टपकायें। घी सूँघने तथा गर्दन नीची करके लिटाने से खून गिरना बंद हो जाता है। 10.बवासीरः वादी बवासीर में गौघृत तथा त्रिफला चूर्ण मिलाकर सेवन करना लाभदायक रहता है। 11.जले हुए शरीर परः गाय के धोये हुए घी के लेप करें। गाय का घी धोकर पिला दें। 12.जुकामः गाय का थोड़ा-सा घी चम्मच में लेकर गुनगुना करें। 13.गुनगुने घी को उंगली में लपेट कर पहले एक नाक के छेद में अन्दर लगायें और घी को अन्दर की तरफ खींचे फिर दूसरे नाक के छेद में लगाकर ऊपर खींचेतुरन्त आराम मिलना शुरू हो जाएगा। इस क्रिया को लगभग 10 मिनट बाद, फिर एक घंटे बाद और आगे आवश्यकतानुसार करते रहें जुकाम बहुत जल्दी पक कर ठीक हो जाता है। 14.शराब का नशा उतारने के लियेः 20 ग्राम घी और 20 ग्राम मिश्री मिलाकर खिलाने से लाभ होता है। 15.होठ फटना या गाल फटनाः होठ फटने या गाल फटने पर गाय के घी में थोड़ा-सा नमक मिलाकर रात्रि में सोते समय लगाने से लाभ होता है। 16.चेहरे की कांति बढ़ानाः रात में सोते समय चेहरे पर घी की मालिश करने से कुछ ही दिनों में चेहरे के दाग, धब्बे तथा झाँई आदि मिट जाते हैं और त्वचा कांतियुक्त हो जाती है। 17.सिर के गिरते हुए बालः घी की मालिश हल्के हाथ से 5 मिनट तक करें।
ترست بايلوت
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